खूनी रविवार क्या है, कब और कैसे हुआ?

यदि आप खूनी रविवार क्या है khuni ravivar kya hai , इसके मुख्य कारण और यह कब और कैसे हुआ? आदि सभी बातों के बारे में जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े.

खूनी रविवार (Bloody Sunday), 22 जनवरी 1905 को हुई एक हिंसक घटना को बोला जाता है, इस दिन रूस की जार सिपाहियों ने सेंट पीटर्सबर्ग स्थान से गुजर रही शांतिपूर्ण मजदूरों  एंव प्रदर्शनकारियों के एक जुलूस पर गोलियाँ बरसाई थी, जिसके वजह से हजारों निहत्थे लोगों की जान गई , क्योंकि यह दिन रविवार था इसलिए इसे “खूनी रविवार” के नाम से जाना जाता है. 

यहा इस लेख में खूनी रविवार या ब्लडी संडे के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गई है. इसलिए यदि आप खूनी रविवार किसे कहते हैं, खूनी रविवार कब हुआ था, खूनी रविवार की घटना कहां और किस देश में घटित हुई, इसके प्रमुख कारण क्या थे, आदि से संबंधित के बारे में डिटेल्स जानना चाहते हैं तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़े.

खूनी रविवार क्या है? (Khuni Ravivar Kya Hai)

खूनी रविवार क्या है

खूनी रविवार (Bloody Sunday), 22 जनवरी, 1905 को सेंट पीटर्सबर्ग, रूस की एक घटनाओं को कहा जाता है. इस दिन को कई हिंसक हमले हुए, जो रूस की जार सिपाहियों ने शांतिपूर्ण मजदूरों एंव प्रदर्शनकारियों के एक जुलूस पर गोलियाँ बरसाई , जिसके वजह से हजारों लोगों की जान गई , क्योंकि इस दिन रविवार था इसलिए इसे “खूनी रविवार” कहा जाता है.

खूनी रविवार, ब्लडी संडे एंव रेड संडे के नाम से भी जाना जाता है. इस घटना ने कई मौतों का कारण बना इसलिए कुछ लोग इसे 1905 की रूसी क्रांति के नाम से जानते हैं.

इस 1905 की इस क्रांति में रूस और जापान एक-दूसरे के विरुद्ध युद्ध कर रहें थे, तो जापान एक छोटा देश होने के बावजूद रूस को हरा दिया. रूस की इस हार से रुसी जनता को अपमानित जैसा लगा जिसके कारण वे लोग क्रांति आन्दोलन शुरू कर दिए. 22 जनवरी, 1905 को जब रूसी जनता प्रदर्शन करते हुए ‘सेंट पिट्सबर्ग’ में स्थित महल के तरफ जा रही थी, तब जार सेना ने इन सभी प्रदर्शनकारियों पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी, जिससे कई हजारों निहत्थे लोगों की मौत हो गई. क्योंकि यह घटना बड़ी और रविवार के दिन हुई थी इसलिए इसे “खूनी रविवार” Bloody Sunday के नाम से याद करते हैं.

नाम

खूनी रविवार (Bloody Sunday)

दिनांक

22 जनवरी (ओ.एस. 9 जनवरी),1905

स्थान सेंट पीटर्सबर्ग, रूसी साम्राज्य
सैनिकों की संख्या

10,000+

प्रदर्शनकारी की संख्या 

3,000 से 50,000

लक्ष्य
  • ज़ार निकोलस द्वितीय को एक याचिका देने के लिए
  • जैसे सुधारों की मांग करना
  • राज्य के अधिकारियों की शक्ति पर सीमाए
  • काम करने की स्थिति और घंटों में सुधार
  • और एक राष्ट्रीय संसद की शुरूआत करना

 

तरीका क्या अपनाया गया

प्रदर्शन मार्च

परिणामस्वरूप श्रमिकों के जुलूस का फैलाव एंव 1905 की रूसी क्रांति की शुरुआत
लीड रोल में

फादर जॉर्जी गैपोन

हताहत और नुकसान
  • मृत्यु 143-234
  • चोटें 439-800
  • गिरफ्तार 6831

खूनी रविवार कब हुआ था?

खूनी रविवार 22 जनवरी, 1905 ईo को रविवार के दिन हुआ था. लेकिन कई जगहों पर इसे 9 जनवरी 1905 भी बतलाया जाता है.

खूनी रविवार के प्रमुख कारण क्या थे?

ब्लडी सन्डे यानी खूनी रविवार के प्रमुख कारण निम्नलिखित दिए गए हैं :

  1. दमन की कठोर नीतियाँ
  2. भूमि सुधारों की विफलता
  3. श्रमिकों की चिंताजनक स्थिति
  4. राज्य के अधिकारियों की शक्ति पर सीमाएं
  5. मध्यम वर्ग के विचारों में परिवर्तन

खूनी रविवार कैसे हुआ?

20वीं सदी के पहले दशक में, रूसी लोग जार निकोलस द्वितीय (Tsar Nicholas II of Russia) के काम एंव निरंकुश शासन से काफी निराश और गुस्से में थे. 22 जनवरी, 1905 (रविवार के दिन) रूस के मजदूरों एंव प्रदर्शनकारियों के एक जुलूस निकोलस द्वितीय को याचिका देने के लिए सेंट पीटर्सबर्ग स्थित विंटर पैलेस की ओर बढ़ा.

प्रदर्शनकारी रूस में Working class की समस्याओं जैसे मजदूरी, काम के घंटे और काम की स्थिति से निकोलस को अवगत कराना चाहते थे. उनलोगों की बात सुनने की बजाए जार के सिपाहियों ने निहत्थे लोगों तथा उनके बीबी-बच्चों पर अंधाधुंध गोली चला दी, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई. यह घटना बड़े पैमाने पर हुई थी और इस दिन रविवार (sunday) था, इस कारण इसे खूनी रविवार (Bloody Sunday) के नाम से जाना जाता है.

इस घटना के बाद रूसी लोगों में जार की इस बर्ताव के प्रति क्रांति की भावना और बढ़ता चला गया, आखिरकार जो एक क्रांति में बदल ही गया इसलिए कुछ लोग इसे 1905 की रूसी क्रांति के नाम से याद करते हैं.

खूनी रविवार का इतिहास (History of Bloody Sunday in Hindi)

मार्च की शुरुआत

रविवार, 22 जनवरी, 1905 की सुबह , हड़ताली मजदूर और उनके परिवार सेंट पीटर्सबर्ग के औद्योगिक बाहरी इलाके में कई जगहों पर इकट्ठा होने लगे. वे सभी धार्मिक चिह्नों को पकड़े हुए थे और भजन और देशभक्ति के गीत गा रहे थे (विशेषकर “गॉड सेव द ज़ार!”), उन्होंने “3,000 से अधिक” की भीड़ सिपाहियों के हस्तक्षेप के बिना विंटर पैलेस (Winter Palace) की ओर बढ़ गए , जो कि जार की आधिकारिक निवास था.

रूस के मजदूरों, प्रदर्शनकारियों एंव मार्च करने वालों के विभिन्न स्तम्भों का इरादा 2 बजे महल के सामने एकत्रित होने का था. प्रारंभ में एक पक्की योजना बन गई थी कि प्रदर्शन की संयुक्त प्रकृति पर जोर देने के लिए महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग श्रमिकों को नेतृत्व करना चाहिए.

वेरा करेलिना, जो गैपॉन के आंतरिक घेरे में से एक थीं, ने महिलाओं को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया था, हालांकि उन्हें पहले से मालूम था कि इसमें उन्हें हताहत होना पड़ सकता है. इसके बावजूद भी महिलाएं, बच्चें, युवा पुरुष अग्रणी रैंक बनाने के लिए आगे बढ़े.

सरकारी तरीके 

मार्च करने वालों को रोकने के लिए किए जा रहे तरीकों के बारे में शनिवार रात को ज़ारसोए सेलो में ज़ार को एक रिपोर्ट दी गई थी.

उसके तुरंत बाद विंटर पैलेस के आसपास पर्याप्त सैन्य बल तैनात किए गए. इनमें इंपीरियल गार्ड भी शामिल थीं, जिन्होंने सेंट पीटरबर्ग और कोसैक्स की स्थायी चौकी प्रदान की.

सैन्य बल को और मजबूत करने के लिए 22 जनवरी की सुबह, रेवेल और पस्कोव से रेल द्वारा लगभग 10,000 सैनिकों को लाया गया. उसके बाद सैनिकों को मजदूरों एंव प्रदर्शनकारियों को महल के चौक तक पहुँचने से पहले मार्च को रोकने का आदेश दिया गया.

महल की योर आगे बढ़ रहे विभिन्न स्तम्भों को तितर-बितर करने के लिए कहा गया और उसके बाद जार सैनिकों को बिना किसी चेतावनी के मार्च करने वालों पर गोली चलाने का आदेश दिया.

जार सैनिकों द्वारा शूटिंग

शूटिंग (गोलीबारी) की पहली घटना सुबह 10 से 11 बजे के बीच हुई जो विंटर पैलेस (Winter Palace) की योर बढ़ रही थी. उसके बाद, नरवा गेट के पास गैपॉन के नेतृत्व वाले स्तंभ पर गोलीबारी की गई. वहां लगभग चालीस लोग मारे गए एंव घायल हुए, हालांकि गैपोन खुद घायल नहीं हुए थे.

नेवस्की प्रॉस्पेक्ट (Nevsky Prospekt) पर दोपहर 2 बजे तक बड़े परिवार समूह सैर कर रहे थे, वे हो रही ज्यादातर शहर में कहीं और हिंसा की सीमा से अनजान थे.

उनमें से कई समूह की दलों ने अभी भी विंटर पैलेस में अपना रास्ता बना रही थीं, जैसा कि मूल रूप से गैपॉन (Gapon) द्वारा किया गया था.

लेकिन इसे रोकने के लिए लगभग 2,300 सैनिकों को पहले ही रिजर्व में रखा गया था, विभिन्न स्तम्भों को रुक जाने के लिए चिल्ला कर चेतावनी देने के बाद एक बिगुल बजाया गया और घबराई हुई भीड़ में चार गोलियां चलाई गईं, जिनमें से कई लोग संगठित मार्च में भाग नहीं ले रहे थे.

मौत एंव हताहतों की संख्या

खूनी रविवार की इस दिन मारे गए लोगों की कुल संख्या अनिश्चित है. रिपोर्ट के अनुसार ज़ार के अधिकारियों ने 96 मृत और 333 घायल लोगों को दर्ज किया. लेकिन आपकों बता दें सरकार विरोधी सूत्रों ने 4,000 से अधिक मृतकों का दावा किया था.

एक अनुमान के मुताबिक औसतन लगभग 1,000 मारे गए या घायल हुए, जो कई इतिहास के किताबों में जानकारी दी गई है.

प्रतिक्रियाओं

ऐसा कहा जाता है कि ज़ार विंटर पैलेस में नहीं था और उसने सैनिकों को गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था, लेकिन खूनी रविवार के घटना के लिए व्यापक रूप से दोषी उसी को ठहराया गया था.  हालांकि मार्च करने वाले लोगों ने यह उम्मीद किया था कि निकोलस उनसे मिलने के लिए पैलेस से बाहर निकलेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

जिन लोगों की हत्या हुई , उनमें से कई ने ज़ार को अपने “छोटे पिता” के रूप में देखा था, लेकिन परिणामस्वरूप निकोलस और उनके निरंकुश शासन ने कई निहत्थे लोगों की जान ले ली.

पूछे जाने वाले प्रश्न

रूस के जार का क्या नाम था?

रूस के जार मुक्तिदाता एलेक्सजेंडर द्वितीय को माना जाता है, वही रूस का अंतिम जार निकोलस द्वितीय था.

रूस के इतिहास में किस घटना को खूनी रविवार के नाम से जाना जाता है?

22 जनवरी (ओ.एस. 9 जनवरी) 1905 रविवार के दिन, रूस की सेंट पीटर्सबर्ग स्थान पर हुई एक हिंसक घटना को खूनी रविवार के नाम से जाना जाता है.

फादर गैपॉन कौन थे?

रूस में हुई खूनी रविवार की घटना में फादर गैपॉन ने ज़ार को एक याचिका देने के लिए एक मार्च का नेतृत्व किया था.

22 जनवरी 1905 को खूनी रविवार की घटना कहाँ हुई थी?

22 जनवरी 1905 को खूनी रविवार की घटना रूस के “सेंट पिट्सबर्ग” में हुई थी.

खूनी रविवार की घटना किस देश में और कहा घटित हुई?

खूनी रविवार यानी ब्लडी सन्डे की घटना “रूस” के “सेंट पिट्सबर्ग” स्थान पर हुई थी.

1905 की रूसी क्रांति के परिणाम क्या थे?

1905 की रूसी क्रांति में हजारों की संख्या में लोगों की मौत हुई थी और अनेंक लोगों को साइबेरिया निर्वासित कर दिया गया था. कई लोगों को फाँसी पर चढ़ा दिये गये और मौत दिया गया था.

आर्टिकल समरी

इस लेख में आपकों खूनी रविवार क्या है (khuni ravivar kya hai), इसके प्रमुख कारण, यह कब और कैसे हुआ , और इसके इतिहास आदि के बारे में जानकारी दी है.

जो आपकों बतलाता है कि खूनी रविवार, 22 जनवरी 1905 को हुई एक घटना को कहा जाता है जिसमें कई लोग की मृत्यु हो गई थी , ऐसा इसलिए क्योंकि जार के सैनिकों द्वारा सेंट पिट्सबर्ग स्थान पर जुलूस कर रहे मजदूरों एंव प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गई थी.

हम उम्मीद करते हैं अब आपकों खूनी रविवार क्या है (What is Bloody Sunday in Hindi) समझ में आ गई होगी. यदि फ़िर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं.

साथ ही यह लेख अच्छा लगने पर कृपया इसे अपने दोस्तों और करीबी लोगों के साथ अपने social networking sites जैसे कि whatsapp, facebook, twitter, आदि पर शेयर कर सकते हैं.

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Written by Hindikul Editorial

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